मौत को छोड़ हर मर्ज की दवा है कलौंजी

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आयुष दर्पण के वेबपोर्टल पर  हमने विभिन्न छोटी छोटी सेहत से जुडी जानकारी आपके समक्ष प्रस्तुत की,लेकिन आज हम एक ऐसी रसोई में प्रयुक्त होनेवाली औषधि के गुणों के बारे में बतायेंगे जिसका जिक्र इस्लाम धर्म के हदीसों में हुआ है। हजरत मोहम्मद इसे मौत के सिवा हर मर्ज की दवा के रूप में बताते थे जी हाँ इसका नाम कलौंजी है।हिंदी में मंगरैल फारसी में स्याहदाना अरबी में हब्बतुस्सोदा,संस्कृत में स्थूलजीरक और अंग्रेजी में Black cumin तथा लेटिन में Nigella sativa
के नाम से जाना जाता है।
आईये इस महत्वपूर्ण साधारण सी प्रतीत होनेवाली  
कलौंजी के गुणों को जानें:

पेट दर्द में-कलौंजी का काढ़ा (16 गुना पानी में खुले बर्तन में उबालकर चार हिस्सा शेष रहने पर) काला नमक के साथ रोगी को प्रातः सायं पिलायें निश्चित लाभ होगा।
मधुमेह-काली चाय बगैर दूध और शक्कर की उसम एक चम्मच कलौंजी के तेल को मिलायें ,इसे नाश्ते से पहले रोगी को सुबह और रात को भोजन के 1 घंटे बाद सोने से पहले पिलायें,इसका हायपोग्लायसेमिक इफेक्ट आपको नजर आएगा।
दमा या एलर्जिक ब्रोंकाइटिस-इस स्थिति में एक कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद तथा आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर खाली पेट सुबह और रात्रि में भोजन के बाद आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद इस प्रकार 30 से 40 दिनों तक लगातार सेवन करायें।बस ध्यान रहे कि ठंडी चीजों का सेवन इस अवधि में न हो।
रीनल स्टोन- गुर्दे की पथरी में कलौंजी को पीस लीजिये फिर पानी से मिला लीजिये अब इसमें शहद मिलाकर लगभग 1 माह तक प्रयोग कराने से निश्चित लाभ मिलता है।
बालों के लिये-कलौंजी की राख को भृंगराज तेल में मिलाकर रोगी को सिर में मालिश करने को कहें यह एलोपेसिया सहित अन्य गंजेपन में भी कारगर है।
हिचकी-यदि किसी को बार-बार हिचकी आ रही हो तो बस कलौंजी के पाउडर को शहद में मिला चटा दीजिये और कमाल देखिये,हिचकी बंद हो जायेगी।
अर्श-कलौंजी की राख को पानी में मिलाकर रोगी को पिला दें निश्चित लाभ मिलेगा।
उच्च रक्तचाप-100 से 200 मिलीग्राम कलौंजी के सत्व को दिन में दो बार रोगी में सेवन कराना उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
कैसे बनायें कलौंजी का तेल-
250 ग्राम कलौंजी को पीस लें अब इसे 2.5 लीटर पानी में उबालें जब 1 लीटर पानी शेष रहे तो इसे ठंडा होने दें।जैसे ही आप पानी को गर्म करेंगे इसका तेल पानी में ऊपर तैरने लगेगा।इस तेल को हाथ से कटोरी में तब तक इकट्ठा करें जब तक कि तैरता तेल ख़त्म न हो जाय, अब इस तेल को छानकर शीशी में एकत्रित कर लें और औषधि के रूप में रोगी को प्रयोग करायें।

कलौंजी का रासायनिक विश्लेषण:-
इसमें स्थिर तेल 31% होता है।जबकि उड़नशील तेल 0.5 से 1.6% होता है।उड़नशील तेल में कार्बन 45 से 60% होता है।इसमें पाये जानेवाले डोलामाइन् एवं सायमिन के अलावा नाइगेलेन् आदि ब्रोंकोडाइलेटर इफेक्ट दर्शाने वाले रसायन पाये जाते हैं।
बस ध्यान रहे कि कलौंजी की अधिक मात्रा में सेवन किसी भी स्थिति में न हो।
प्रयोज्य मात्रा1 से 3 ग्राम

नोट:यह प्रयोग केवल चिकित्सकीय ज्ञान हेतु प्रकाशित है किसी भी प्रकार से कलौंजी का स्वतः प्रयोग नुकसान दे सकता है।
*कलौंजी*पर आप अपने अनुभव हमें ayushdarpan@gmail.com पर शेयर करें 

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