हिमालयी क्षेत्र की एक अद्भुत वनस्पति ‘अगस्त’

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स वनस्पति के  वृक्ष आपको अक्सर हिमालयी क्षेत्र में  अपनेआप लगे हुए दिख जायेंगे ,खासकर उन स्थानों में जहां पानी प्रचुर मात्रा में  मिलता है ..इस वनस्पति का नाम है “अगस्त” जिसे लेटिन में सेस्बनिया ग्रेनडफ्लोरा ,संस्कृत में  अगस्त्य,मुनिदृम आदि नामों से भी जाना जाता है

यह एक ऐसी वनस्पति है जिसका प्रयोग मिर्गी,आधाशीशी,जुकाम,नेत्र विकारों सहित पेटदर्द की चिकित्सा में विभिन्न औषधि योगों के साथ किया जाता रहा है

-स्त्रियों में खासकर होनेवाले ल्युकोरीया (श्वेतप्रदर ) में इसकी ताज़ी छाल को यवकूट कर इसके रस को भिंगोकर योनि में रखने मात्र से लाभ मिलता है !

-इसके बीजों का चूर्ण बनाकर पांच से दस ग्राम की मात्रा में  गाय के धारोष्ण दूध के साथ सुबह-शाम प्रयोग करने से याददाश्त शक्ति अच्छी हो जाती है !

-बुखार   (विशेषकर तीसरे दिन छोड़कर लौट कर आनेवाले ) में इसकी पत्तियों के  स्वरस को पिलाने बुखार का आना रुक जाता है !

-इसकी पत्तियों के रस की दो-चार बूंदे नाक में टपका देने से बेहोशी दूर हो जाती है

-बच्चों में इसके पत्तियों के स्वरस को पांच से दस ग्राम की मात्रा में पिलाने से भी पेट से सम्बंधित समस्याओं में काफी लाभ मिलता है !

ये तो इसके कुछ औषधीय गुण हैं इसके अधिक गुणों को आप विडीयो डाक्यूमेंट्री  में स्पष्ट रूप से जान सकते हैं !

 

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