आयुर्वेद पर अन्तराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं वर्कशाप का हुआ नेपाल में समापन

आयुष दर्पण फाउंडेशन, विश्व आयुर्वेद परिषद नेपाल एवं पतंजलि आयुर्वेद मेडिकल कालेज के संयुक्त तत्वाधान में नेपाल में पहली आयुर्वेद विषय पर आयोजित दो दिनी संगोष्ठी एवं कार्यशाला का समापन हो गया।काठमांडू से 25 किलोमीटर दूर काभ्रे नामक स्टेट के धूलिखेल में स्थित रमणीक एवं हिमालय की सुरम्य वादियों के मध्य स्थित पतंजलि आयुर्वेद मेडिकल कालेज एवं रिसर्च सेंटर में दिनांक 5 एवम 6 अप्रेल को दो दिनी कार्यशाला नेपाल भारत के बीच मैत्री सेतु के रूप में कार्य करने का काम कर गई।इस संगोष्ठी में नेपाल,भारत ,अमरिका के आयुर्वेद के विद्वानों ने आयुर्वेद विषय पर मंथन किया।कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र में नेपाल के स्वास्थ्य एवं जनसंख्या राज्य मंत्री डॉ सुरेंद्र कुमार यादव ने इस संगोष्ठी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आयुर्वेद को नेपाल में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम नेपाल सरकार करेगी ।कांफ्रेंस के चेयरमेन पतंजलि आयुर्वेद मेडिकल कालेज के चेयरमेन डॉ प्रोफेसर रामचन्द्र अधिकारी ने भारत और नेपाल के बीच मित्रता से आगे रोटी और बेटी के अटूट संबंध का हवाला देते हुए कहाआयुर्वेद इस संबंध को और अधिक प्रगाढ़ करने में मददगार साबित होगा।उद्घाटन सत्र में नेपाल और भारत के वरिष्ठ राजनयिक एवं विभिन्न विश्विद्यालयो के कुलपति भी मौजूद रहे ।उद्घाटन सत्र में नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री केशव प्रसाद उपाध्याय सहित पतंजलि आयुर्वेद मेडिकल कालेज के ट्रस्टी इंजीनियर शालिग्राम सिंह भी मौजूद रहे।कार्यक्रम को पतंजलि आयुर्वेद हरिद्वार से आचार्य बालकृष्ण ने भी दूरभाष पर सम्बोधित किया साथ ही सभी छात्र छात्राओं सहित आयुर्वेद प्रेमियों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में कीनोट स्पीच देते हुए नेपाल के वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ आर आर कोइराला ने नेपाल के प्राकृतिक संसाधनों के और अधिक वैज्ञानिक रूप से शोध का जड़ी बूटी संवर्धन कर आयुर्वेद विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम में कीनोट स्पीच देते हुए प्रख्यात मर्म चिकित्सा विशेषज्ञ प्रोफेसर सुनील जोशी ने मर्म चिकित्सा विज्ञान के नेपाल में प्रचार प्रसार पर बल दिया। कार्यक्रम में प्रथम दिन तीन वैज्ञानिक सत्रों का आयोजन हुआ जिसे नेपाल सहित भारत के बनारस हिंदू विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों ने चेयर किया।प्रथम दिवस ही प्रोफेसर सुनील जोशी ने मर्म विज्ञान के सैधांतिक एवं प्रायोगिक पक्षो पर विस्तार से प्रकाश डाला जिसपर नेपाल के चिकित्सकों की रुचि देखते ही बनती थी।प्रथम दिवस ही संध्या में नेपाल की लोककला को बिखेरती हुई सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ जिसमें नेपाल के पांचों आयुर्वेदिक कालेजो के छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया।दूसरे दिन की शुरूवात प्रातःकालीन मर्म प्राणासन सत्र से हुई जिसमें चिकित्सको सहित छात्र छात्राओं ने मर्म विज्ञान के प्राणासनों पर बारीकियों का अध्ययन किया।दूसरे दिन भी तीन वैज्ञानिक सत्रों का आयोजन हुआ जिसमें मर्म विज्ञान सहित कई अन्य विषयों पर शोध पत्र पढ़े गए।पुनः इसी दिन प्रोफेसर सुनील जोशी ने मर्म विज्ञान पर तथा मुम्बई से आये डॉ उदय कुलकर्णी ने विधाग्नि पर विशेष प्रायोगिक सत्रों का आयोजन किया।सत्र के अंत मे प्रश्नोत्तर सेशन भी आयोजित हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने मर्म विज्ञान से संबंधित जिज्ञासाओं को प्रोफेसर सुनील जोशी से साझा किया।इसके बाद वेलिडेक्टरी सेशन में प्रतिभागियो को प्रमाणपत्र वितरित किये गए।इसी सत्र में प्रोफेसर सुनील जोशी एवं प्रोफेसर श्याममणी अधिकारी को मर्म विज्ञान समिति का मुख्य परामर्शदाता तथा प्रोफेसर रामचन्द्र अधिकारी,डॉ निर्मल भुसाल,डॉ नवीन जोशी (भारत),डॉ कोपिला अधिकारी,डॉ सुमन खनाल आदि कोर्डिनेटर नियुक्त किये गये।यह समिति नेपाल में मर्म विज्ञान से सबंधित कार्यक्रमों एवं प्रोटोकाल डेवलपमेंट का कार्य करेगी।

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डॉ नवीन जोशी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ है जिन्हें आयुष दर्पण पत्रिका एवं आयुष दर्पण फाउंडेशन के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।

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