ये दो बातें आवश्यक है लंबी आयु के लिये

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युर्वेद शास्त्र में लंघन के उपक्रमों में उपवास एवं

व्यायाम को प्रमुख माना गया है लंघन के विभिन्न उपक्रमों को शरीर के अंदर हल्कापन लानेवाले उपायों में वर्णित किया गया है।आयुर्वेद शास्त्र में जिन बातों को हजारों वर्ष पूर्व जीवन जीने की कला के रूप में वर्णन किया गया है कमोबेश आजका विज्ञान भी उन्हीं बातों को सत्य मान रहा है।हमारा शरीर स्वयं ही स्वयं को स्वस्थ रखने का प्रयास करता है।यदि हम शरीर को एक बड़ी यूनिट माने तो इसको बनाने वाली छोटी इकाईयां हर उस कार्य को करने में सक्षम हैं जो एक पूरा शरीर।शरीर की छोटी इकाई कोशिकाएं भोजन ग्रहण करने,सांस लेने ,गति सहित अन्य सभी क्रियाएं को करने योग्य होती हैं ।जिस प्रकार मानव शरीर एक आयु पूर्ण कर मृत्यु को प्राप्त होता है ठीक उसी प्रकार शरीर की एक कोशिका अपने जीवन को पूरा कर मृत्यु को प्राप्त होती है जैसे लाल रक्त कणिकाएं ठीक 120 दिन बाद मृत्यु को प्राप्त हो जाती हैं।मेरे इस लेख का उद्देश्य सिर्फ इतना बताना है कि जिस प्रकार हम अपने आसपास के परिवेश को साफ सुथरा रखने को स्वच्छता अभियान चलाते हैं ठीक उसी प्रकार शरीर एवं इसकी छोटी इकाई कोशिकाएं भी स्वयं की स्वच्छता का पूरा ख्याल रखती है एवं इस हेतु वह कुछ ऐसी प्रक्रियाओं से गुजरती है जिसे हम डेटक्सिफाईंग प्रॉसेस कहते हैं।आप को यह जानकर आश्चर्य होगा तथा आपने स्वयं यह अनुभव भी किया होगा कि कुछ लोग जो शराब,धूम्रपान एवं ऊलजलूल खाने के बाद भी लंबी आयु को जीते हैं जबकि अधिकांश के साथ ऐसा नही होता है।इस प्रक्रिया को थोड़ा अधिक समझने के लिए हमें ‘आटोफेगी’ शब्द को समझना होगा -जिसे स्वयं का भक्षण भी कहा जाता है।यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे शरीर अपने अंदर उत्पन्न हुई कूड़े कबाड़ जिसे टॉक्सिन कहा जाता है को बाहर निकाल साफ करता है तथा मरी कोशिकाओं का अंतिम संस्कार कर उन्हें रिसायकल कर डालता है।’आटोफेगी’ एक ऐसी प्रक्रिया है जो खराब कूड़े कबाड़ को बाहर निकाल हमारे मानव शरीर रूपी मशीन को औऱ अधिक तंदरूस्त बनाती है इतना ही नही यह कैंसर कोशिकाओं के निर्माण एवं चयापचय की गडबडियों जैसे मोटापा एवं मधुमेह आदि को ठीक करती है।यानि यदि हम लंबी आयु जीना चाहते हैं या यूं कहें कि हम बढ़ती उम्र को रोकना चाहते हैं तो हमे शरीर को अधिक से अधिक ‘आटोफेगी’ यानि सेल्फ क्लीनिंग की आवश्यकता है।आईये जाने कैसे हम स्वयं के अंदर की स्वच्छता को बहाल कर सकते हैं। आयुर्वेद शास्त्र में जो विधियां शरीर मे हल्कापन लाने की बताई गई है वही विधियां शरीर मे आटोफेगी को बढ़ा कर स्वच्छता को मेंटेन रखती है। *व्यायाम*-नियमित व्यायाम शरीर को रोगमुक्त रखने हेतु आवश्यक है।व्यायाम को जीवन मे नियमित रूप से अपनाकर हम शरीर के अन्दर बनने वाली कैंसर कोशिकाओं के निर्माण को रोक सकते हैं।व्यायाम केवल शरीर की गंदगी को डेटॉक्सिफाइ ही नही करता बल्कि रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है।ऐसा जानवरो में भी देखा गया है कि जब उन्हें तीस मिनट तक ट्रेडमिल पर दौड़ाया गया तो उनके शरीर मे ‘आटोफेगी’ प्रोसेस औऱ अधिक तेज हो गईं।अर्थात नियमित व्यायाम शरीर को अंदर से साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। *उपवास*- यूं तो उपवास को हमने अपने तीज त्योहारों से जोड़ कर रखा है परंतु आपके लिए यह जानना भी उतना ही आवश्यक है कि उपवास भी शरीर की सेल्फ क्लीनिंग यानि आटोफेगी की प्रक्रिया को बढ़ाता है।उपवास नये स्टेम कोशिकाओं को रीजनेरेट करता है ,कैंसर कोशिकाओं के निर्माण को रोकता है एवं मधुमेह तथा हृदयाघात के खतरे को कम कर देता है।इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जब भी हम अपनी कोशिका के पावरहाउस ‘मायटोकॉन्ड्रिया’ को जरूरत से अधिक ईंधन सप्लाई करते हैं ये अतिरिक्त ईंधन को ‘इलेक्टर’ के रूप में लीक करते हैं जो शरीर में क्रियाशील ऑक्सीजन के स्पेसीज के निर्माण को बढ़ा देते हैं जिन्हें फ्री रेडिकल्स कहा जाता है।उपवास के द्वारा हम अपनी कोशिकाओं के पावर हाउस ‘मायटोकांड्रिया’ को मिलने वाले अतिरिक्त इंधन को रोक देते हैं जिसके कारण फ्री -रेडिकल्स का निर्माण रुक जाता है।यह देखा गया है कि चूहों,मछलियों एवं मक्खीयों में कैलोरी को नियंत्रित कर उनमे भी उम्र के कारण होनेवाली बीमारियों को रोका जा सकता है।(यह कैसे होता है यह अबतक अनुत्तरित है)।विभिन्न शोध भी इस बातको सिद्ध करते हैं कि उपवास कर हम रोगी के इम्यून सिस्टम को होनेवाले नुकसान से न सिर्फ बचा सकते हैंबल्कि यह इम्यून सिस्टम को रीजनेरेट करने में भी मददगार होते हैं।यह पाया गया है कि उपवास शांत पड़ी स्टेम कोशिकाओं को सेल्फ-रिन्यूवल स्टेज में पहुंचा देती है जो स्टेम कोशिकाओं के द्वारा होनेवाली पुननिर्माण की प्रक्रिया को तेज कर देता है।अर्थात उपवास न केवल पुरानी पड़ चुकी इम्यून कोशिकाओं को खत्म कर नई ब्रांड न्यू स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।इस प्रकार हम यह समझ सकते है कि व्यायाम और उपवास दो ऐसी प्रक्रियाएं जो शरीर की आंतरिक स्वच्छता के लिए आवश्यक हैं ।

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