वाराणसी शहर हुआ योगमय

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वाराणसी: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर देश भर में लोग योग करने और उसे सीखने में जुटे हैं। वाराणसी में भी जेल से लेकर जल तक और स्कूल से लेकर देवालय तक हर जगह योग करते लोग दिख रहे हैं। ये योग के प्रति एक नई तरह की जागरूकता है। ऐसा नहीं कि अपने देश में पहले से योग नहीं रहा है, लेकिन इन दिनों योग को लेकर जैसी जागरूकता आई है, वो अगर वाकई जीवनचर्या में उतर जाता है, तो ये सभी के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।
इसी बेहतर स्वास्थ्य और अच्छी मानसिक स्थिति के लिए वाराणसी के सेंट्रल जेल में हर सुबह कैदियों को योग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये प्रशिक्षण जेल के ही डॉक्टर अभिषेक कुमार सिंह देते हैं, जो किसी कुशल योगाचार की तरह कैदियों को योग की बारीकियां सिखाते हैं। जेलर वीके गौतम कहते हैं, योग तो बंदियों को स्वस्थ रखने के लिए, उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति ठीक रहे, इसके लिए है। और जबसे विश्व योग दिवस की घोषणा की गई है, तब से विभिन्न संस्थाओं द्वारा इन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। कैदियों के मानसिक तनाव को दूर करने में योग सहायक है।वाराणसी के पड़िनी कन्या विद्यालय के मंदिर में भी योग का प्रशिक्षण पूरी तन्मयता से चल रहा है। इसमें ख़ास बात ये है कि गर्मियों की छुट्टी में जो बच्चे उधम मचाते, मौज-मस्ती के साथ दूसरे तरह के खेल खेलते थे, वे बच्चे भी योग की कठिन से कठिन विधा का अभ्यास कर रहे हैं। मजे की बात ये है कि सुबह-सुबह सबसे पहले बच्चे ही तैयार होकर इन योग शिविरों में आ जा रहे हैं। स्कूलों में चलने वाले योग शिविरों में वो बच्चे ज़्यादा बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं, जिनका इस बार बोर्ड का एग्जाम है। हाई स्कूल की परीक्षा में बैठने वाली बच्ची सिमरन कहती है कि एग्जाम का बहुत स्ट्रेस रहता है, योग से उसे कम करने में बहुत मदद मिलेगी।इन सबसे जुदा वाराणसी के तुलसीघाट पर गंगा में कुछ लोग सुबह से ही जल योग करना शुरू कर दे रहे हैं। इस जल योग में पद्मासन, कमल आसन, शवासन जैसे कठिन योग किए जा रहे हैं। इस जल योग को करने के लिए बड़े तो हैं ही, बच्चे भी इसमें पूरे उत्साह से भाग ले रहे हैं। इनका ये योग बिल्कुल अलग तरह का है। इनका उद्देश्य भी औरों से जुदा है। ये जल में आसन अपने स्वास्थ्य से कहीं ज्यादा उन लोगों के मदद के लिए कर रहे हैं, जिन्हें अच्छी शिक्षा और अच्छा इलाज नहीं मिल पाता है। इस योग के जरिये वो लोगों का इनकी तरफ मदद करने के लिए ध्यान खींचना चाहते हैं। जल योग प्रशिक्षक पवन शर्मा इसे और अधिक साफ़ करते हुए बताते हैं कि “मां गंगा की गोद में जल योग उन लोगों के लिए किया जा रहा है, जो शिक्षा और चिकित्सा सुविधा से वंचित हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी इस पर ध्यान दे और ऐसे लोगों की मदद करें।”
योग के जरिये अपने स्वास्थ्य के साथ दूसरों की भी चिंता करना ये बड़ी बात है। जिस तरह इन दिनों योग को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ी है, अगर ये उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाए, तो उनका स्वास्थ्य तो बेहतर होगा ही, देश को भी एक नई सोच मिलेगी।

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