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अपने लिवर का रखें ख़याल

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ज हम डायबीटीज एवं ह्रदय रोगों की चर्चा हरेक मंच पर करते हैं पर कहीं न कहीं शरीर की केमिकल फेक्ट्री को हम भूल जाते हैं Iवजन में केवल डेढ़ किग्रा का लिवर हमारे ऊपरी उदर के दाईं ओर स्थित होता है और यह खाए गए भोजन को संसाधित करता है जिसके बाद इसे हमारी आंतें अवशोषित कर लेती हैं. यह कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लाइकोजन के रूप में जमा करके रखता है और जब भी जरूरत होती है यह तुरंत ही इसे ग्लूकोज के रूप में उपलब्ध करा देता हैI लिवर का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्यूंकि यह हमारे द्वारा लिए गए हानिकारक पदार्थों को भी निष्क्रिय कर देता है और ऐसा प्रोटीन पैदा करता है जो हमें संक्रमण और अत्यधिक रक्तस्राव से बचाता हैIलिवर का स्वस्थ रहना इस बात पर निर्भर करता है कि हमारा खान पान एवं जीवनशैली कैसी है ,बस उनमें मामूली सा परिवर्तन हमारे लिवर को स्वस्थ रख सकता है I मैंने इससे पूर्व के लेखों मैं भी इस महत्वपूर्ण अंग के विषय में ‘फेट्टी लिवर’ के विषय में आपको संक्षिप्त में जानकारी उपलब्ध कराई थी जिसे काफी पसंद किया गया है Iआईये आज हम शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग के बारे में अपनी जानकारी को अद्यतन करें !
भारत में मृत्यु होने के 10 शीर्ष कारणों में से लिवर का रोग भी एक है बड़ा कारण है ,यह रोग हर उम्र के लोगों पर अपना असर दिखाता हैंI ऐसा अनुमान है कि हमारे देश में हर साल लगभग दो लाख लोग लिवर की बीमारियों से दम तोड़ देते हैंI
*क्या हैं बड़े खतरे : लिवर की तीन सबसे घातक स्थितियां होती हैं जिन्हें क्रमशः चर्बीदार लिवर(फेटटी लिवर) हेपेटाइटिस एवं सिरोसिस के रूप में जाना जाता है I आइसीएमआर के आंकड़ों पर गौर करें तो ऐसा अनुमान लगाया गया है कि हमारी आबादी का 32 फीसदी हिस्सा ‘एनएएफएलडी’ (नान- एल्कोहलिक-फेटटी-लिवर-डिजीज ) से पीड़ित है,यह आंकड़ा शराब की लत के शिकार लोगों में होनेवाले (एएफएलडी) में कहीं अधिक हैI लिवर में अतिरिक्त और अवांछित वसा 30 फीसदी मामलों में लिवर कोशिका की गड़बड़ी का कारण बन जाती है जो अक्सर ‘सिरोसिस’ का रूप धारण कर लेता है इस स्थिति में लिवर सख्त, भूरा, छोटा और गांठदार हो जाता हैI इसलिए यह आवश्यक है कि ‘एफएलडी’ यानि चर्बीयुक्त लिवर का जल्द इलाज करा लिया जाए, जिसके लिए औषधि लेने से श्रेष्ठ विकल्प यह हैकि कम कैलोरी, कम वसा और अधिक प्रोटीन, नियमित व्यायाम और एल्कोहल की मात्रा को सीमित कर दिया जाय Iइसके अलावा ‘हेपेटाइटिस’ लिवर में आयी एक प्रकार की सूजन है जो दूषित जल में विषाणुओं, असुरक्षित यौन संबंध और संकमित सुई के संपर्क से हो सकती है. इससे पीलिया यानी जांडिस उत्पन्न हो जाता है,ऐसी स्थिति में भोजन में ढेर सारे कार्बोहाइड्रेट ( लगभग 50-60 फीसदी) वेजिटेबल-प्रोटीन्स ( लगभग 20-30 फीसदी) और कम वसा ( लगभग 10-20 फीसदी) शामिल करना चाहिए I ताजे फल और जूस (सेब, अंगूर, गन्ना, नींबू का रस, नारियल पानी), सब्जियां (मूली, पालक, बंद-गोभी, खीरा, चुकंदर, टमाटर, करेला) और प्रोटीन (दाल, मटर, फलियां और मेवे)आदि लेना ऐसी स्थितियों में फायदेमंद होता है I
किन चीजों से बचें :
*भोजन में तले हुए खाद्य पदार्थ, नमकीन, अचार, जंक फूड, कंसंट्रेटेड शुगर , एल्कोहल एवं रेड-मीट खाने से बचना चाहिएI
*बिना कारण एवं बिना परामर्श दवा खाने से बचना चाहिए I
क्या खाएं :अपने रात्रि भोजन की आधी प्लेट में बिना स्टार्च वाली सब्जियां शामिल करें,जिसमें एक-चौथाई प्रोटीन एवं शेष स्टार्च हो I
एरेटेड ड्रिंक्स के स्थान पर ताजे फलों का जूस, सब्जियों के सूप या छांछ का सेवन करना चाहिएIभोजन तब ही करना चाहिए जब आपको भूख लगे और अपनी क्षमता से आधा भोजन ही करना बेहतर है I

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