आयुष दर्पण

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akshi tarpanaनेत्र यानि आँखें हमारी सुंदरता के साथ प्रकृति प्रदत्त ज्ञानेंद्रिय भी है जिसका स्वस्थ रहना नितांत आवश्यक है।आपने अब तक पंचकर्म चिकित्सा की सीरीज में विभिन्न विधियों को क्रम से जाना,जिसपर हमारी वेबसाइट पर लगातार प्रतिक्रियायें प्राप्त हो रही हैं ।आज हम आपको नेत्र के स्वास्थ्य सहित रोगों से रक्षण करने वाली विधि जिसे अक्षितर्पण के नाम से जाना जाता है कि जानकारी देने जा रहे हैं।
यदि आप निम्न नेत्र की परेशानियों से जूझ रहे हों जैसे:-
आँखों‬ के सामने अँधेरा छाना (Blurring of vision)
टेढ़ी‬ आँख (Obliquation)
अभिष्यंद‬ (Conjunctivitis)
पलकें‬ ठीक से न खुलना (Ptosis)
वात‬ पर्याय (Inflammation of the eyes)
‪‎दृष्टि‬ दोष(Myopia or Hypermetropia)
अर्जुन‬ (Subconjuctival hemorrhage/Mole/Melanoma)
कृच्छउन्मीलन‬(Belepherospasm)
अधिमंथ‬ (Glaucoma) आदि
तो इन सभी स्थितियों में अक्षितर्पण आपके लिये श्रेष्ठतम विकल्प है ।
जानें कैसे करें अक्षितर्पण:-
नेत्र तर्पण की प्रक्रिया से पूर्व आप नेत्र रोगी का शोधन (वमन,विरेचन,नस्य) अवश्य करें।
इसके बाद रोगी को द्रोणी या टेबल जो भी उपलब्ध हो उसपर पीठ के बल लिटा दें।
अब जौ और उड़द के पीसे हुये पाउडर को गूंथ कर उसकी आँखों के चारों ओर एक मेड़ या पाली (Covering wall) तैयार कर लें।इसकी ऊंचाई लगभग 2 अंगुल होनी चाहिये।बस ध्यान रहे कि यह टूटे नही ।अब इसमें औषध सिद्ध घृत को सुखोष्ण कर रोगी को आँखें बंद करने का निर्देश देते हुये भर दें।
अब रोगी को बार-बार आँखें खोलने और बंद करने को कहें ।
अब रोग अनुसार निश्चित समयोपरांत अपांग ( Canthus) से छेद कर इस औषधि सिद्धित घृत को बाहर निकाल दें।

कब तक करायें अक्षितर्पण:-
‪‎वर्त्म‬ Disease associated with Eye lids में -लगभग 30 से 32 सेकेण्ड
नेत्र‬ संधि(Junction of the anatomical part of eyes) के रोगों में-लगभग डेढ़ मिनट
दृष्टि रोगों में (Visionary impairment)-लगभग साढ़े 4 मिनट
अधिमंथ(Glaucoma) में-लगभग 5 मिनट 4 सेकेण्ड
वातज‬ व्याधियों में-लगभग 30 सेकेण्ड
पित्तज‬ व्याधियों में-लगभग 3 मिनट
‪‎कफज‬ एवं स्वस्थ व्यक्ति में-लगभग 3 मिनट तक नेत्र तर्पण कराना चाहिये।
वातिक रोगियों में प्रतिदिन नेत्र तर्पण कराना चाहिये।
पैत्तिक रोगियों में एक दिन छोड़कर नेत्र तर्पण कराना चाहिये।
कफज एवं स्वस्थ व्यक्तियों में दो-दो दिन छोड़कर नेत्र तर्पण कराना चाहिये।
कब समझें कि नेत्रतर्पण ठीक हुआ है :-
जब आँखों में प्रकाश को सहने की क्षमता तथा हल्कापन प्रतीत हो रहा हो तो समझें की तर्पण ठीक हुआ है और इसके ठीक विपरीत लक्षण उत्पन्न होने पर इसे ठीक न होंने का indication मानें।
तर्पण में प्रयुक्त  औषधियां:-
त्रिफला‬ घृत
कब नेत्र तर्पण न करायें:_
अत्यधिक गर्मी,अत्यधिक ठण्ड,रोगी तनाव में हो,बादल लगे हों तो अक्षि तर्पण न करायें ।
अक्षि तर्पण के उपरान्त रोगी के चेहरे को साफ़ कर गुनगुने जल से कुल्ला करवा कर हल्का भोजन देना चाहिये।
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चिकित्सकीय ज्ञान हेतु प्रसारित

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1 thought on “जानें क्या है अक्षितर्पण

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