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जानें माँ के दूध समान गुणों से युक्त है यह वनस्पति

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हम जिन पौधों को बेकार या खरपतवार की श्रेणी में मान अक्सर उनके बारे में नकारात्मक सोच रखते हैं यकीन मानिए कि वे भी अत्यंत ही दुर्लभ औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं ऐसे कई छोटे-छोटे पौधे हैं जो हमें अक्सर बेकार एवं खरपतवार के रूप में मुंह चिढ़ाते हैं क्योंकि हम उनके उपयोग को नहीं जानते औऱ हम उन्हें महज कांटेदार झाड़ियां या खरपतवार समझ अनदेखा कर देते हैं ।आइए आज आपको हम ऐसी ही एक औषधीय वनस्पति जो आज कल बारिश के मौसम में हिमालय की तलहटी एवं मैदानी क्षेत्रों में बहुतायत से दिखाई दे रही है की जानकारी देने जा रहे हैं जिसका नाम ‘दूधी’ है ।घास के रूप में नजर आती है यह इधर उधर फैली दूधिया घास मिल्क एडम के नाम से भी जानी जाती है। संस्कृत में इसे दुग्धिका या नागार्जुनी के नाम से जाना जाता है। यूफोरबिया हिरता लेटिन नाम से प्रचलित यह वनस्पति अपनी रोयेंदार पत्तियों एवं तनों से निकलने वाले दूध (लेटेक्स) के लिए जानी जाती है।इसकी 2 प्रजातियां बड़ी दूधी एवं छोटी दूधी पाई जाती है जिनमें सुगंधित तेल कार्बीकरोल, लाईमोमिन आदि पाए जाते हैं। पत्तियों एवं तनों में ग्लाइकोसाइड्स पाये जाते हैं ।
आईये जानते है विभिन्न रोगों में दूधी किस प्रकार लाभ देती है:-
-महिलाओं में माहवारी से सम्बंधित समस्या में हरी दूधी को छाया में सुखाकर कूटकर एक चम्मच दिन में दो बार चिकित्सकीय परामर्श से देने से मासिक स्राव नियंत्रित होता है ।
-बच्चों में यदि दस्त लगने जैसी समस्या हो तो इसकी पत्तियों के चूर्ण को मात्रा अनुसार चिकित्सक के परामर्श से देने से दस्त को रोकने में लाभ मिलता है
– खूनी आंव दस्त में भी दूधी बड़ी ही उपयोगी है दूधी के पंचांग का 10 से 15 एम एल का स्वरस शहद के साथ देने मात्र से खूनी दस्त एवं आंव में काफी लाभ मिलता है।
– महिलाओं में होने वाली लिकोरिया  ( श्वेतप्रदर) की समस्या में भी दूधी काफी लाभ देती है इसकी जड़ को निकालकर साफकर 3 से 5 ग्राम की मात्रा में छानकर दिन में दो से तीन बार देने से श्वेतप्रदर की समस्या में काफी लाभ मिलता है।
नाम के अनुरूप दूधी स्तनपान करानेवाली माताओ में स्तन्य वर्धक गुणों से युक्त होती है, दूधी के दूध (लेटेक्स) 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम तक माता को पिलाने से स्तन्य (दुग्ध) की वृद्धि करता है।
-चेहरों पर होनेवाले कील मुहांसों में भी दूधी का दूध काफी लाभकारी होता है।
– दूधी का प्रयोग पैर में गड़े कांटे को निकालने में भी अक्सर वैद्य करते हैं कांटे वाले स्थान में दूधी को पीसकर लेप करने से कांटा निकल जाता है ।
– दमा में भी दूधी के पंचांग का प्रयोग काफी लाभकारी होता है सरस 5 से 10 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ देने से सांस की तकलीफ में आराम होता है इन्हीं कारणों से इसे अस्थमा प्लांट के नाम से भी जाना जाता है।
– पंचांग का स्वरस कनेर के पत्तों के स्वरस के साथ मिलाकर लगाने से बालों का सफेद होना एवं झड़ना रूक जाता है।
-बच्चों में हकलाने की समस्या में भी दूधी की जड़ के चूर्ण को 2 से 3 ग्राम की मात्रा में पान के साथ चूसते रहने से काफी लाभ मिलता है।
-दूधी का अधिक मात्रा में प्रयोग हृदय के लिये नुकसानदायक हो सकता है।
दूधी जैसी खरपतवार श्रेणी की वनस्पतियों को इकट्ठा कर इसकी औषधीय गुुणों के प्रति लोगों को जागरुक करते हुए इसके व्यावहारिक  एवं व्यवसायिक प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है निश्चित रूप से खरपतवार श्रेणी की अनेक ऐसी बेकार जान पड़ने वाली वनस्पतियों की उपयोगिता का सार्थक प्रयोग पर्यावरण संरक्षण सहित मानव स्वास्थ्य के लिए महर्षि चरक द्वारा उद्धृत कथन-संसार मे मौजूद सारे द्रव्य औषध हैैं बशर्ते कि हमे उसके उपयोग की जानकारी को सत्य सिद्ध करता है।
नोट: इस लेख में लिखे गए दूधी के सभी गुण महज चिकित्सकीय ज्ञान के लिए प्रसारित हैं किसी भी प्रकार से इनका स्वप्रयोग नुकसानदायक हो सकता है ।लेख का उद्देश्य बेकार जान पडने वाली वनस्पतियों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

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