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पत्तियां नही जड़ों से भी उपयोगी है यह वनस्पति

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औषधीय पौधों  को जानने के क्रम में आज आपको एक ऐसे औषधीय पौधे के बारे में बताने जा रहे हैैं जिसका नाम  टुडेलिया एकलुआटा है वैसे तो इसकी टुडेलिया एसियाटिका सहित कई प्रजातियां पाई जाती है । इसे जंगली काली मिर्च के नाम से जाना जाता है ।यह एक छोटा पौधा है, जो अपने कांटेदार तनो के सहारे दूसरे वृक्ष पर चढ़ जाता है ,इसकी पत्तियों पर गौर किया जाए तो इसकी पत्तियां हरी और चमकीली तथा गंध युक्त होती है तथा इस पर आने वाले फूल क्रीम कलर के होते हैं इस पौधे की जड़ अत्यंत ही महत्वपूर्ण है जिसमें एक प्रभावशाली रसायन ‘कोमरीन’ पाया जाता है जो अपने एंटीप्लाज्मोडियल गुणों के कारण जाना जाता है जिस कारण इसका प्रयोग एंटीमलेरियल होता है ।इसकी पत्तियों में पाए जाने वाला एसेंशियल ऑयल जोड़ों के दर्द एवं सूजन में राहत देता है अतः इसका प्रयोग गठिया जैसे दर्द में भी किया जाता है तथा इससे बनाए गए ऑइंटमेंट का प्रयोग चोट -मोच एवं मांस पेशियों के खिंचाव के लिए काफी लाभकारी प्रभाव दर्शाता है। इस पौधे से प्राप्त ‘टोड़ेलीन’ नामक रसायन ओस्टियोक्लासटोजेनेसिस को रोककर ओस्टियोब्लास्टोजेनेसिस को बढ़ाता है पौधे के अंदर एंटीट्यूबरक्यूलर एंटीवायरल के साथ साथ एंटीट्यूमर अर्थात टयूमर्स को नष्ट करने के गुण भी पाए गए हैं जो अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं।इन्ही कारणों से खांसी ,जुखाम,इन्फ़्लुएन्ज़ा (H1N1 वायरस) जैसी स्थितियों में किया जाता है। इस पौधे का उपयोग सांप के काटे में भी जहर को कम करने के लिए एंटीडॉट के रूप में किया जाता है ।इस पौधे पर किये गये कई वैज्ञानिक अध्ययन इस बात को साबित करते हैं टुडेलिया एकलुआटा विभिन्न प्रकार के रेसिस्ट हुए बैक्टीरियल एवं अन्य संक्रमणों को ठीक करने में भी काफी उपयोगी है । क्षेत्रों में आदिवासी जनजाति इस पौधे की पत्तियों का प्रयोग मुहं के छालों को  ठीक करने में करते हैं हमने आपको आज अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि वनस्पति के बारे में जानकारी दी आयुष दर्पण के पाठकों के लिए इस प्रकार की कई औषधीय वनस्पतियों की जानकारी सहित लाइव वीडियोस वेब पोर्टल पर उपलब्ध है आप सीधे हमारी हिंदी वेब पोर्टल http://ayushdarpan.com
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