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सोरायसिस रोग के लिए घरेलु उपचार

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हम सभी सोरायसिस को एक क्रानिक त्वचा रोग के रूप में जानते हैं जिसमें रोगप्रतिरोधकक्षमता की मध्यस्थता के कारण त्वचा में सूजन जैसी स्थिति पैदा होती है।
इस बीमारी में त्वचा में कुछ बिखरे हुए,लाल स्केल्स के सामान पैचेज उत्पन्न हो जाते हैं।इस बीमारी के लगातार आगे बढ़ने से रोगी एक प्रकार की मानसिक विकलांगता की स्थिति से जूझता है।इस रोग में रोगी की जिंदगी भी बुरी तरह से प्रभावित होती है।कई बार रोगी ह्रदय,अवसाद एवं सोरीयेटिक-आर्थराईटीस जैसी अन्य समस्याओं से भी दो चार होता है।

किन कारणों से सोरायसिस उत्पन्न होता है?:
इसके सटीक कारण अभी तक अज्ञात हैं,केवल कुछ रिस्क-फेक्टर्स की जानकारी है जो इस रोग को एक्वायर्ड सोरायसिस के रूप में उत्पन्न कर सकते हैं।आईये जानें कुछ घरेलु सरल उपाय जिनके प्रयोग से इस रोग को दुष्प्रभाव रहित उपाय के रूप में चमत्कारिक प्रभाव उत्पन्न करने के कारण जाना जाता हैI

एलोई-वेरा (घृत-कुमारी):-विभिन्न शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं की घृतकुमारी से बनाया गया जेल सोरायसिस के कारण उत्पन्न त्वचा की लालिमा एवं स्केलिंग को कम कर देता है।इसे प्रभावित स्थान पर दिन में तीन बार लगाना काफी फायदेमंद होता है।यदि आप इस क्रीम का स्वयं निर्माण कर रहे हैं अथवा बाजार से खरीद रहे हैं तो सर्वप्रथम सुनिश्चित करें की उसमें घृतकुमारी की मात्रा 0.5% हो।घृतकुमारी की पत्तियों का एक्सट्रेक्ट लेकर बनाया गया लेप भी त्वचा की लालिमा एवं स्केलिंग को कम कर देता है।शोध बताते हैं कि घृतकुमारी में पाया जानेवाला एंथ्राक्विनोन एवं एसीमेनन में जीवाणुरोधी प्रभाव होते हैं जो सोरायसिसके रोगियों में सूखे हुए एवं स्केली पैचेज को साफ कर देते हैं।इसके अतिरिक्त इसमें मौजूद सेलीसायलिक एसिड एक प्रकार से कीटोलायटीक एजेंट का कार्य करता है जो सोरायसिस के रोगियों मैं त्वचागत प्लेक्स के डी- स्कूवेमेशन को रोकता है।
सेव निर्मित सिरका या एप्पल-सिडर-वेनिगर :इस सिरके का प्रयोग प्राचीन काल से ही एक प्रभावी घरेलु औषधि के रूप में होता रहा है।यह खुजली एवं त्वचा की शुष्कता में अत्यंत उपयोगी
घरेलु औषधि है।इसे पानी के साथ 1:1के डायल्यूशन में लेना चाहिए।
केपसेसीन:लाल मिर्च से प्राप्त केपसेसिन को सोरायसिस के रोगियों के लिए अत्यंत प्रभावी हर्बल रेमेडी माना गया है।यह नर्व-एंडिंग्स पर कार्य करता है,यह सोरायसिस के रोगियों की त्वचा में उत्पन्न वेदना को कम कर देता है।यह सोरायसिस से प्रभावित रोगियों के उपयोग के लिए उपलब्ध विभिन्न क्रीम्स एवं आइन्टमेंट का एक सक्रिय घटक द्रव्य है।
टी-ट्रीऑयल: यह एक आस्ट्रेलियन पौधा है जिसमें एंटीसेप्टिक गुण पाये जाते हैं।स्थानीय लोग इसके शेम्पू का इस्तेमाल स्केल्प सोरायसिस को कम करने में करते हैं।इसे टापीकल एप्लीकेशन के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।
हल्दी:इसे आप सभी प्रभावी एंटीइंफ्लेमेटरी एवं एंटीआक्सीडेंट गुणों के कारण दुनिया भर में जाना जाता है।इसे सोरायसिस के लिये सबसे बेहतरीन हर्बल रेमेडीज के रूप में जाना जाता है।इसमें मौजूद करक्यूमिन शरीर के जेनेटिक एक्स्प्रेसन को बदल देता है।यह दावा किया गया है की करक्यूमिन ट्यूमर- नेक्रोजिंगग-फेक्टर (टी.एन.एफ.) सायटोकाइनिन के एक्सप्रेशन को बदल देता है।यह सोरीयेटिक- आर्थराईटीस एवं अन्य लक्षणों को भी कम करने में मददगार होता है।हल्दी का प्रयोग सदियों से भारतीय रसोई में होता आ रहा है।एफ.डी.ए .के अनुसार भी 1.5 से 3.0ग्राम हल्दी का नियमित प्रयोग शरीर के लिए सुरक्षित है।
मेहोनीया एक्विफोल्लेयम/ओरेगन ग्रेप्स:यह सोरीएसिस के रोगियों के लिए बड़ी उपयोगी हर्बल रीमेडी है।इसे तीव्र जीवाणुरोधी प्रभाव के कारण जाना जाता है।यह इम्यून रेस्पोन्स को बदलने में कारगर औषधि है।शोध अनुसार 10% मेहोनीया युक्त क्रीम का प्रयोग सोरीएसिस के रोगियों में अत्यंत लाभ उत्पन्न करता है।इसे बाह्य प्रयोग में लाई जानेवाली औषधि के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।
फिश-आयल:ओमेगा-3-फेटी एसिड भी सोरायसिस की चिकित्सा के लिए उपयोगी माना गया है।यह भी त्वचा की सूजन को कम कर देता है।इसकी औषधि प्रयोग मात्रा 3ग्राम या इससे कम है।
इसके अलावा सोरायसिस के रोगियों में आयुर्वेद में वर्णित ‘सिद्धार्थक स्नान’ का प्रयोग भी लाभकारी प्रभाव उत्पन्न करता है।ऐसा देखा गया है कि सोरीएसिस के रोगियों में शराब के सेवन से दी जा रही चिकित्सा प्रभावित होती है।
सोरायसिस के रोगियों को निश्चित मात्रा में सूर्य के प्रकाश का सेवन भी लाभ देता है।हाँ ओवरक्सपोजर नुकसान उत्पन्न कर सकता है।आप रोगियों को टारगेटेड अल्ट्रावायलेट-फोटोथेरेपी दे सकते हैं।

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