आयुर्वेद की शक्ति: सोरायसिस के 20 रोगियों पर वैद्य नवीन जोशी का सफल ‘वमन’ ट्रायल
देहरादून। आधुनिक जीवनशैली और तनाव के कारण त्वचा रोगों, विशेषकर ‘सोरायसिस’ (Psoriasis) के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। जहाँ एक ओर दुनिया भर में इसे एक लाइलाज और केवल नियंत्रण योग्य बीमारी माना जाता है, वहीं आयुर्वेद के पंचकर्म ने एक नई राह दिखाई है। प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य नवीन जोशी द्वारा किए गए एक विशेष क्लिनिकल ट्रायल में सोरायसिस के 20 रोगियों पर ‘वमन कर्म’ के आश्चर्यजनक परिणाम सामने आए हैं।
क्या है यह शोध और इसके परिणाम?
वैद्य नवीन जोशी ने अपने इस शोध में 20 ऐसे रोगियों को शामिल किया जो पिछले कई वर्षों से गंभीर सोरायसिस, त्वचा पर चांदी जैसी पपड़ियाँ जमने (Scaling) और असहनीय खुजली से पीड़ित थे। आयुर्वेद के ‘वमन कर्म’ (Therapeutic Emesis) प्रक्रिया के माध्यम से इन रोगियों के शरीर से जमे हुए विषैले तत्वों (Toxins) को बाहर निकाला गया।
ट्रायल के मुख्य निष्कर्ष:
-
त्वचा में सुधार: 18 रोगियों की त्वचा में 85% से अधिक सुधार देखा गया।
-
खुजली से राहत: मात्र 15 दिनों के भीतर खुजली और जलन में भारी गिरावट दर्ज की गई।
-
जड़ पर प्रहार: वमन प्रक्रिया ने शरीर के दोषों (कफ और पित्त) को शुद्ध कर बीमारी के दोबारा होने की संभावना को कम किया।
वैद्य नवीन जोशी का संदेश
इस सफलता पर बात करते हुए वैद्य नवीन जोशी ने बताया, “सोरायसिस केवल बाहरी त्वचा की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के आंतरिक असंतुलन का परिणाम है। आयुर्वेद में ‘वमन’ को सबसे उत्तम शोधन माना गया है। हमने वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इन 20 रोगियों का उपचार किया और परिणाम बताते हैं कि यदि सही विधि से पंचकर्म किया जाए, तो सोरायसिस जैसी बीमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।”
क्या होता है ‘वमन कर्म’?
यह पंचकर्म की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें औषधीय स्नेहपान (घी का सेवन) कराने के बाद, शरीर के दोषों को औषधियों के माध्यम से बाहर निकाला जाता है। यह न केवल त्वचा को स्वस्थ बनाता है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाता है।
इस शोध के परिणामों ने आयुर्वेद जगत में एक नई चर्चा छेड़ दी है और यह उन लाखों रोगियों के लिए उम्मीद की किरण है जो सोरायसिस से जूझ रहे हैं।
