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CCRAS ने लॉन्च किया SIDDHI 2.0 — आयुर्वेद फार्मा सेक्टर में शोध आधारित नवाचार को मिलेगी गति

केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) ने विजयवाड़ा में अपने उद्योग–अनुसंधान इंटरफ़ेस कार्यक्रम के दूसरे संस्करण SIDDHI 2.0 का शुभारंभ किया। यह राष्ट्रीय मंच आयुर्वेद फार्मा सेक्टर में शोध आधारित उत्पाद विकास, उद्योग सहयोग, स्वदेशी तकनीक और गुणवत्ता नियमन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान CCRAS ने “Evolution of Ayurveda, Siddha & Unani Drug Regulations in India” पुस्तक तथा ड्रग इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल जारी किए। SIDDHI 2.0 में दक्षिण भारत की 25 से अधिक प्रमुख आयुर्वेदिक दवा कंपनियों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों तथा आयुष अधिकारियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने माना कि प्रमाण आधारित आयुर्वेदिक उत्पादों के विकास, आधुनिक शोध पद्धतियों, तकनीक-सक्षम स्टार्टअप समर्थन और उद्योग–शैक्षणिक समन्वय से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आयुर्वेद फार्मास्यूटिकल इकोसिस्टम का निर्माण संभव है। SIDDHI 2.0 को भविष्य के आधुनिक, विस्तारशील और वैज्ञानिक आयुर्वेद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय ने अपने प्रमुख उद्योग–अनुसंधान इंटरफ़ेस कार्यक्रम के द्वितीय संस्करण SIDDHI 2.0 (Scientific Innovation in Drug Development, Healthcare & Integration) का शुभारंभ विजयवाड़ा में किया। यह दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन रीजनल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (RARI), विजयवाड़ा द्वारा CII, विजयवाड़ा ज़ोन के सहयोग से आयोजित किया गया है।

शोध, उद्योग और नियामकों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय मंच

SIDDHI 2.0 का उद्देश्य शोध आधारित आयुर्वेदिक उत्पाद विकास में तेजी लाना, उद्योग साझेदारी को सशक्त बनाना, स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना तथा प्रमाण आधारित आयुर्वेद फार्मास्यूटिकल इकोसिस्टम को मजबूत करना है। यह आयोजन संपूर्ण आयुर्वेद उद्योग, शिक्षाविदों और नियामक निकायों को एक साझा मंच पर लाकर सहयोग एवं नवाचार को गति देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान नई पहलों का शुभारंभ

उद्घाटन सत्र में CCRAS ने अपनी मेडिकल-ऐतिहासिक पुस्तक “Evolution of Ayurveda, Siddha & Unani Drug Regulations in India” तथा ड्रग इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल जारी किया। परिषद ने कहा कि ये पहल गुणवत्ता, विनियमन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आयुर्वेद को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्य वक्ताओं के विचार

  • प्रो. वि.रवि नारायण आचार्य, महानिदेशक, CCRAS ने कहा कि जीवनशैली संबंधी रोग बढ़ रहे हैं और ऐसे समय में आयुर्वेद की वेलनेस-सेंट्रिक सोच अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने उद्योग के साथ सहयोग, संयुक्त अनुसंधान तथा IPR के समतामूलक वितरण की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • श्री के. दिनेश कुमार, IAS, निदेशक (आयुष), आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में आयुर्वेद महाविद्यालयों एवं दवा इकाइयों की सीमित संख्या पर चिंता जताई और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का सुझाव दिया।

  • डॉ. एन. श्रीकांत, उप महानिदेशक, CCRAS ने बताया कि परिषद अब तक 150 से अधिक आयुर्वेदिक फार्मूलों का वैधीकरण कर चुकी है तथा गुणवत्ता, सुरक्षा एवं विषाक्तता संबंधी व्यापक शोध डेटा उद्योग के लिए उपलब्ध है।

औद्योगिक दृष्टिकोण

लैला न्यूट्रा एवं केमिलोइड्स लाइफ साइंसेज़ के सीईओ श्री किरण भूपतिराजू ने कहा कि वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों एवं जड़ी-बूटियों का आधुनिककरण समय की मांग है।
डॉ. वी. नागलक्ष्मी, चेयरपर्सन, CII (विजयवाड़ा ज़ोन) ने शिक्षा, शोध, विनिर्माण और उद्योग विकास के तालमेल को आयुर्वेद के आर्थिक विस्तार की कुंजी बताया।

तकनीकी सत्र और सहभागिता

कार्यक्रम के दौरान CCRAS वैज्ञानिकों तथा प्रमुख आयुर्वेदिक कंपनियों — जिनमें हिमालया वेलनेस कंपनी, ओषधि, IMPCOPS, लैला न्यूट्रा, IMIS फार्मास्यूटिकल्स आदि शामिल हैं — ने शोध उपलब्धियों, नव विकसित तकनीकों एवं संभावित उद्योग सहयोग क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की।
सम्मेलन में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिनमें दक्षिण भारत की 25+ प्रमुख आयुर्वेदिक कंपनियाँ, शोधकर्ता, चिकित्सक, शिक्षाविद, राज्य आयुष अधिकारी तथा डॉ. NRS आयुर्वेदिक कॉलेज, विजयवाड़ा के स्नातकोत्तर विद्यार्थी शामिल रहे।

आयुर्वेद को सशक्त भविष्य की ओर

राष्ट्रीय ट्रांसलेशनल एक्सेलरेटर के रूप में परिकल्पित SIDDHI 2.0 का लक्ष्य CCRAS तकनीकों के व्यापक औद्योगिक अपनाव को बढ़ाना, गुणवत्ता एवं नियामक ढांचे को उन्नत करना, तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आयुर्वेदिक औषधि उद्योग विकसित करना है।
वैज्ञानिक नवाचार और उद्योग सहयोग को साथ लेकर चलने वाला यह कार्यक्रम भारत के समग्र स्वास्थ्य एवं आयुष नवाचार दृष्टिकोण के अनुरूप आधुनिक, प्रमाण-आधारित और विस्तारशील आयुर्वेद की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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