देहरादून में सम्पन्न हुई नाड़ी परीक्षा, मर्म चिकित्सा और अग्निकर्म की राष्ट्रीय कार्यशाला
देहरादून में सम्पन्न हुई दो दिवसीय नाड़ी परीक्षा, मर्म चिकित्सा एवं अग्निकर्म कार्यशाला — आयुष दर्पण फाउंडेशन की एक और अभिनव पहल
📅 दिनांक: 27 जुलाई 2025
📍 स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
🖊️ रिपोर्ट: आयुष संवाददाता
आयुर्वेद की जड़ों से जुड़ते नवाचार की दिशा में एक और कदम
आयुष चिकित्सा पद्धति को जनमानस के बीच वैज्ञानिक और व्यावहारिक स्वरूप में प्रस्तुत करने के लिए आयुष दर्पण फाउंडेशन द्वारा दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन देहरादून में किया गया। इस कार्यक्रम में नाड़ी परीक्षा, मर्म चिकित्सा और अग्निकर्म चिकित्सा पर केंद्रित हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई।
कार्यशाला का उद्घाटन और नवाचार की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. बी. डी. जोशी और सचिव श्री माधव शर्मा ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर आयुर्वेद में नवाचार के रूप में विकसित ‘नाड़ी घड़ी (Tridosha Nadi Clock®)’ का भी अनावरण किया गया। यह अभिनव उपकरण अब ‘हिमायु केयर’ के माध्यम से पूरे भारतवर्ष में उपलब्ध कराया जाएगा।
विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण सत्र
इस कार्यशाला में प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने प्रतिभागियों को नाड़ी विज्ञान और मर्म चिकित्सा की बारीकियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाया। साथ ही वैद्य शिवानी कोठियाल द्वारा अग्निकर्म एवं अग्निविद्ध चिकित्सा की सटीक तकनीकों पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत सराहा।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता
यह कार्यशाला विविध राज्यों और देशों से आए चिकित्सकों के लिए एक उत्कृष्ट मंच साबित हुई। कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल रहे:
- 🇨🇦 कनाडा से ख्यातिप्राप्त कवि श्री गोपाल बघेल ‘मधु’
- 🇳🇵 नेपाल से डॉ. अविनाश जायसवाल
- 🇮🇳 गुजरात से डॉ. कोमल व्यास, डॉ. हरीश चंद्र प्रजापति
- 🇮🇳 हरियाणा से डॉ. ललित शर्मा
- 🇮🇳 मुंबई से इस्कॉन प्रतिनिधि श्री उदय
कार्यशाला में भारत के कोने-कोने से आए 60 से अधिक वैद्य और आयुर्वेद चिकित्सकों ने भाग लिया और गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
🌿 संक्षेप में:
यह आयोजन आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक युग के अनुसार ढालते हुए प्रशिक्षित वैद्यों को एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहाँ वे प्रयोगात्मक आयुर्वेद के सिद्धांतों को व्यावहारिक जीवन में लागू कर सकें। नाड़ी परीक्षा, मर्म चिकित्सा और अग्निकर्म जैसे विषयों पर कार्यशालाएँ भारतीय चिकित्सा विज्ञान के नवयुग की शुरुआत हैं।
📸 फोटो गैलरी, प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और प्रमाणपत्र विवरण के लिए वेबसाइट विज़िट करें:
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