छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित हुए डॉ. नवीन जोशी, मर्म चिकित्सा के व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को किया लाभान्वित
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. नवीन चंद्र जोशी (MD Ayurveda) को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय एवं आदरणीया श्रीमती वंदना पाठक के आमंत्रण पर आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. जोशी ने मर्म चिकित्सा के महत्व एवं उसके व्यावहारिक पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए।
उल्लेखनीय है कि डॉ. नवीन जोशी ने इसी विश्वविद्यालय से आयुर्वेदाचार्य की उपाधि प्राप्त की थी। जिस शिक्षण संस्थान से उन्होंने अपने आयुर्वेदिक चिकित्सा जीवन की शैक्षणिक यात्रा प्रारंभ की, उसी संस्थान में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित होना उनके लिए अत्यंत गौरवपूर्ण एवं भावुक क्षण रहा।
कोविड महामारी के समय से लेकर अब तक डॉ. जोशी ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से लाखों विद्यार्थियों और चिकित्सकों को नाड़ी परीक्षा एवं मर्म चिकित्सा का प्रशिक्षण एवं ज्ञान प्रदान किया है। आयुर्वेद की इन पारंपरिक चिकित्सा विधाओं को व्यावहारिक और क्लिनिकल दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने में उनका निरंतर योगदान रहा है।
इस आयोजन का एक विशेष पक्ष आदरणीया श्रीमती वंदना पाठक से जुड़ा रहा। वे स्वयं आयु में डॉ. जोशी से वरिष्ठ हैं, लेकिन उनसे प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें गुरु के रूप में सम्मान देती हैं। यह प्रसंग भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान के प्रति सम्मान की सुंदर मिसाल प्रस्तुत करता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के Institute of Allied Health Sciences में भी डॉ. जोशी के समय को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रैक्टिकल सेशन आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को मर्म चिकित्सा के व्यावहारिक पक्षों से परिचित होने तथा इसके अनुप्रयोग को समझने का अवसर मिला।
डॉ. नवीन जोशी ने इस अवसर पर माननीय कुलपति महोदय, आदरणीया श्रीमती वंदना पाठक, डॉ. प्रवीण कटियार, अपने प्रोटोकॉल ऑफिसर श्री बी.के. यादव तथा विश्वविद्यालय की पूरी टीम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि अपने ही विश्वविद्यालय में लौटकर विद्यार्थियों के बीच अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करना उनके लिए अत्यंत आत्मीय एवं प्रेरणादायक अनुभव रहा।
आयुष दर्पण की विशेष टिप्पणी: आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से आगे बढ़ाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को भारतीय चिकित्सा पद्धति की व्यावहारिक समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
संपादन: आयुष दर्पण न्यूज़ डेस्क
