आयुष दर्पण

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सृस्टि के उत्पति काल से ही मानव में रोगों की उत्पत्ति हुई, इन्ही कारणों से सृष्टि के स्वानी ब्रह्मा ने रोगों से होनेवाले दुख को दूर करने के लिए आयुर्वेद की उत्पत्ति की।सृष्टि जिसे ब्रह्मांड कहा जाता है असीमित और अलौकिक शक्तियों का केंद्र है और ब्रह्मांड से ही ॐ ध्वनि की उत्पत्ति होती है जिसे ब्रह्मनाद यानि कॉस्मिक साउंड कहा जाता है । यदि ॐ शब्द को देखें तो यह तीन अक्षरों से मिलकर बना है अ ,उ और म ।यहाँ अ का अर्थ निर्माण से ,उ का अर्थ विकास से और म का अर्थ मौन धारण से है।
इसी ब्रह्मनाद यानि ॐ के उच्चारण को यदि मानव प्राणायाम के अभ्यास के दौरान नियमित रूप से पालन करता है तो इससे निकली बिभिन्न फ्रेक्वेंसी की साउंड वेव्स हमारी शारिरिक और मानसिक दोनों ही स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इस ब्रह्मनाद के उच्चारण के फायदे को कुछ यूं बयान किया गया है:-
भृकुटि महल चढ़ देख लो प्यारे उलटी गंग बहावे ॐ ! सोऽहं सोऽहं जपते जपते पहुंचो दसवें द्वारा ॐ !
अर्थ यह है कि ॐ ध्वनि के उच्चारण मात्र से व्यक्ति सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है ।आप प्रातःकाल ब्रह्मनाद का अभ्यास कर इसे स्वयं सिद्ध कर सकते हैं।
ॐ उच्चारण के लाभ को विभिन्न ऋषियों ने कहा है कि हमारा मेरुदंड एक बंकनाल है (अग्नि को फूंकने का यंत्र) जो मूलाधार चक्र से ऊर्जा को ऊपर की ओर ब्रह्मरंध तक ले जाने में सक्षम है।कहा गया है कि यदि आप तल्लीनता से ॐ का उच्चारण एक नाद के रूप में करते हैं तो आप आध्यात्मिक ऊर्जा के शिखर को प्राप्त कर सकते हैं।
कैसे करें ब्रह्मनाद?
प्रातःकाल शांत स्थल पर ब्रह्मनाद का अभ्यास विशेष लाभ देता है।
पूरी गहराई तक सांस लें और सांस को छोड़ने तक ॐ का उच्चारण करें।
सुखासन या पद्मासन या सिद्धासन की मुद्रा में बैठकर ब्रह्मनाद करना विशेष रूप से उवयुक्त है
किसे नही करना चाहिए ब्रह्मनाद:
यदि को हार्ट सर्जरी हुई ही तो ब्रह्मबाद न करें
यदि इसके अभ्यास के दौरान कोई घबराहट हो रही हो तो भी अभ्यास रोक दें।
स्त्रियों में गर्भावस्था या मासिक धर्म के समय ब्रह्मनाद का अभ्यास नही करना चाहिए।
ज्वर, फेफड़ो के संक्रमण,मानसिक बीमारियों की स्थिति में भी ब्रह्मनाद का अभ्यास नही करना चाहिए।
ब्रह्मनाद के लाभ:
ब्रह्मनाद ह्रदय के रक्तसंचरण को सुचारू बनाता है।
ब्रह्मनाद के दौरान फेफड़ों से शरीर की कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन मिलता है जिससे कोशिकाओं को नई ऊर्जा मिलती है तथा बेजान पड़ी कोशिकाओं में भी सक्रियता आ जाती है।
ॐ के उच्चारण के दोरान गले मे होनेवाले कम्पन से थायराइड की समस्या में भी लाभ मिलता है।
ॐ के उच्चारण से मष्तिस्क शांत रहता है जिससे एंजाइटी और डिप्रेशन के रोगियों में अद्भुत लाभ मिलता है।
ॐ के नियमित उच्चारण से शरीर मे डोपामीन्स,इंडोर्फिन्स,सेरेटोनिन एवं आक्सीटॉनिन का स्तर बढ़ता है जिसके अच्छे प्रभाव मिकते हैं।

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