आयुष दर्पण

स्वास्थ्य पत्रिका ayushdarpan.com

“न्यूट्रीशनल वीक स्पेशल”:सेहत के लिए फायदेमंद हैं मोटे अनाज

1 min read
Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और खानपान में हम जहां रेडीमेड,प्रोसेस्ड और फास्टफूड के आदि होते जा रहे हैं वहीं सदियों से भारतीय परंपरा में भोजन में लिये जानेवाले मोटे अनाज आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाये हुए हैं।यदि हम सामान्य बोलचाल की भाषा मे मोटे अनाज की बात करें तो ज्वार,बाजरा,रागी आदि को इनमे शामिल किया जाता है ।ये मोटे अनाज सामान्य रूप से खाये जानेवाले चावल एवं गेहूं जैसे लोकप्रिय और अत्यधिक प्रचलन में खाये जानेवाले अनाज से कहीं अधिक पोषक तत्वों से युक्त होते हैं। आईये जानते हैं इन मोटे अनाजो के बारे में।                                                1.रागी(मडुआ):- इसे भारतीय मूल का मोटा अनाज माना जाता है इसका पोषण मान उच्च होता है इसमें 345 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम केल्शियम ,3.9मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम आयरन पाया जाता है।रागी में पाये जानेवाले केल्शियम की मात्रा किसी भी अन्य अनाज में पाए जानेवाले अनाज की तुलना में कहीं अधिक होती है।इसमें पाया जानेवाला लौह तत्व भी बाजरे को छोड़कर अन्य सभी अनाजो से अधिक है।इसे मधुमेह (शुगर) के रोगियों के लिये बेहतरीन आहार के रूप मे माना जाता है क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है।इसे आजकल इंस्टेंट (तुरंत) खिचड़ी के रूप में प्रायः सभी प्रकार के रोगी ,बालक एवं बुजुर्गों को दिया जा सकता है।30 ग्राम रागी(मडुवा) शरीर को 100 किलो कैलरी ऊर्जा देता है। रागी में 113.5%रेशा पाया जाता है जो पेट को साफ रखता है।

2.बाजरा:-मोटे अनाजों में बाजरा भी एक महत्वपूर्ण फसल है ।बाजरे के प्रति 100 ग्राम में 11.6 ग्राम प्रोटीन,67.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट,8 मिलीग्राम लौह तत्व एवं 132 माइक्रो ग्राम आंखों के लिये महत्वपूर्ण तत्व प्रोटीन पाया जाता है। बाजरे के दानों को पीसकर इसकी रोटी बनाकर खाने का प्रचलन सदियों से रहा है।इसके दानों को उबालकर नमक मिर्च डालकर बनाई गई खिचड़ी भी स्वाद एवं पोषण से युक्त होती है।आयुर्वेद में इसे अग्नि ( भूख) को बढाने वाला,देर से पचनेवाला,बलवर्धक एवं कांतिवर्धक माना गया है।इसमे प्रोटीन ,लौह तत्व तथा एमिनो अम्ल प्रचुर मात्रा में पाए जाते है ।यह कैंसर कारक टॉक्सिन्स के निर्माण को रोकता है ।बाजरा मांसपेशियों को मजबूत करता है साथ ही शरीर को स्फूर्ति प्रदान करता है।प्रचुर मात्रा में आयरन होने से रक्ताल्पता के रोगियों में यह अत्यंत लाभकारी है साथ ही इसको नियमित लेने से शरीर मे हीमोग्लोबिन एव प्लेटलेट्स की कमी नही होती है। इसमे मौजूद केल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है तथा गर्भवती महिलाओं के लिये भी अत्यंत गुणकारी है।चिकित्सको ने इस मोटे अनाज को शरीर के लिये बहुत अधिक उपयोगी माना है और आज इससे बनी खिचड़ी, चाट,पकौड़े,सूप,बाटी, मठरी ,हलवा, लड्डू,बर्फी,बिस्कुट,केक आदि की लोगों में काफी मांग है। बाजरे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है अतः डायबेटिक रोगियों के लिये भी यह नियमित प्रयोग योग्य मोटा अनाज है। बाजरे में सर्वाधिक रेशा 122.3%पाया जाता है ,यह पानी को सोखता है तथा फूलने वाले एजेंट के रूप में कार्य करता है जिससे इसे लेनेवालों मेंसामान्य रूप से कब्ज की समस्या उत्पन्न नही होती है।।      

3.ज्वार:- ज्वार आज शिशु के लिये बनाये जाने वाले आहार का प्रमुख घटक है।इसके पोषण वेल्यु की बात करें तो इसके प्रति 100 ग्राम में10.4 ग्राम प्रोटीन,66.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, इसमे 89.2%रेशे पाये जाते हैं जो आंतों में मल को जमा होने से रोकता है।

4.मकई :-मकई के दानों को सुखाकर इसके आंटे का प्रयोग किया जाता है।इसके आंटे में प्राकृतिक ब्रेन, रेशे एवं प्रोटीन पाये जाते हैं।इसमें विटामिन बी,ओमेगा 6 अनसेचुरेटेड फेट और वनस्पति प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।दुनिया भर में फ़ारटीफायड मकई के आंटे की बहुत अधिक मांग है यह कुपोषण को दूर करने में बहुत अधिक मददगार है।इसमे पायेजानेवाले फायबर (रेशे) पाचनक्रिया को मजबूत बनाते है साथ ही पेट के रोगों को दूर करते हैं।मक्के में पायजानेवाला फोलिक एसिड एवं विटामिन बी 12 एनीमिया (खून की कमी) को रोकता है साथ ही नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण को भी बढ़ाता है।इसमें पाया जानेवाला स्टार्च तुरंत ऊर्जा देता है।डायटीशियन भी व्यायाम करने से पूर्व मक्का खाने की सलाह देते है क्योंकि इसको लेने से बहुत ही जल्दी और काफी देर तक शरीर को ऊर्जा मिलती रहती है।जो लोग अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं उनके लिये मक्का बहुत ही अधिक फायदेमंद है।शोध में यह पाया गया है कि मक्के के तेल के सेवन से धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल नष्ट होता है तथा इसमें पाया जानेवाला ओमेगा-3 फेटी एसिड दिल को बीमार होने से बचाता है।मक्के में पाया जानेवाला फेरुलिक अम्ल स्तन और लीवर के ट्यूमर को नष्ट करनेवाले गुणों से युक्त होता है साथ ही कैंसर होने की सभावना को भी कम कर देता है।इसके दाने में मौजूद केरेटेनॉइड्स आंखों की रेटिना के लिये लाभकारी है साथ ही विटामिन ए दृष्टि की समस्याओं को दूर करता है।मक्के में पायेजानेवाले थायमिन को बुढ़ापे में होनेवाले एल्जाइमर रोग के लिये भी लाभकारी माना गया है।एक कप मक्के के रस के नित्य सेवन से बाल गिरने,रूखे होने जैसी समस्याओ से राहत मिलती है।इसमें मौजूद लाइकोपीन एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं तथा बालों को मजबूत बनाता है।मक्का,ज्वार, बाजरा और अन्य मोटे अनाजों का उत्पादन भारत की कुल खाद्यान्न उत्पादन क्षमता का एक चौथाई है।उत्त्तराखण्ड के पर्वतीय अंचलों में रागी(मडुआ), सावा(झंगोरा) आदि को पारंपरिक खेती के रूप में उगाया जाता रहा है उच्च पोषक गुणों से युक्त ये मोटे अनाज पहाड़ों की विषम भौगौलिक परिस्थिति के मद्देनजर लोगों को स्वस्थ ,निरोगी और तंदरुस्त रखने वाले गुणों से युक्त हैं।इनमे रागी यानि मडुए की रोटी तो पहाड़ के प्रायः सभी घरों में खाने को मिल जाती है।इसे पहाड़ी अनाजों का राजा भी कहा जाता है।मोटे अनाज की विशेषता है कि यह आसानी से पैदा होनेवाली फसल है जिसकी पोषक गुणवत्ता काफी अधिक है जिसे पहले न्यून आय वर्ग के लोगों का भोजन समझा जाता था आज उच्व आयवर्ग के लोगों का भी यह मोटा अनाज पसंददीदा बन गया है जो शॉपिंग कॉम्लेक्स एवं मॉल्स की शोभा बढ़ा रहा है                                                                    आज जब सितंबर पहले सप्ताह को पोषण सप्ताह (न्यूट्रीशनल वीक )के रूप में मनाया जा रहा है तो जरूरत इन उच्च पोषण मानवाले मोटे अनाजो को अपने भोजन में प्रयोग करने के लिये लोगों को अधिक से अधिक प्रेरित करने की है साथ ही पर्वतीय एवं ग्रामीण अंचलों में इनकी खेती को और अधिक संरक्षण के साथ साथ बाजार मूल्य देकर किसानों को शारीरिक एवं आर्थिक पोषण देने की है।

Facebooktwitterrssyoutube
Facebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

2 thoughts on ““न्यूट्रीशनल वीक स्पेशल”:सेहत के लिए फायदेमंद हैं मोटे अनाज

  1. अच्छी जानकारी।इसी प्रकार जानकारिया भेजते रहे।धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2019 AyushDarpan.Com | All rights reserved.