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“रेयर डेजर्ट बेरी” – एक नई प्राकृतिक आशा: डायबिटीज़ के इलाज में क्रांति?

एक दुर्लभ रेगिस्तानी फल Nitraria roborowskii पर हालिया शोध में डायबिटीज़ के इलाज में आशाजनक परिणाम सामने आए हैं। अध्ययन में ब्लड शुगर नियंत्रण, इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार और मेटाबॉलिक संतुलन बहाल करने की क्षमता देखी गई। यह प्राकृतिक हर्बल विकल्प आयुर्वेद और आधुनिक हर्बल चिकित्सा में नई संभावनाएँ खोल सकता है।

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📰 प्रमुख बातें

  • एक दुर्लभ रेगिस्तानी फल — Nitraria roborowskii (जिसे कभी-कभी “डेजर्ट चेरी / रेगिस्तानी बेरी” भी कहा जाता है) — पर वैज्ञानिक अध्ययन हुआ है, जिसने मधुमेह (डायबिटीज़) के इलाज में इसके उपयोग की आशा जगाई है।

  • प्रयोगशाळा आधारित इस अध्ययन में, डायबिटिक चूहों (माइसेज़) को इस बेरी के अर्क (एक्सट्रैक्ट — NRK-C) दिए गए — नतीजा दिलचस्प रहा: ब्लड शुगर लेवल में 30-40% तक कमी, इंसुलिन संवेदनशीलता में लगभग 50% सुधार, और चयापचय (मेटाबॉलिज्म) के अन्य विकारों जैसे फैट मेटाबॉलिज्म व ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में भी सुधार देखा गया।

  • इस अर्क ने शरीर की अंदरूनी रूप से ग्लूकोज़ (शर्करा) और ऊर्जा संलयन (मेटाबॉलिज्म) प्रणाली — विशेष रूप से एक महत्वपूर्ण सेलुलर सिग्नलिंग मार्ग PI3K/AKT signaling pathway — को पुनः सक्रिय किया। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह सिर्फ लक्षणों को दबाता नहीं बल्कि शरीर की मूल मेटाबॉलिक समस्या को दुरुस्त करने की दिशा में काम कर रहा है।अध्ययन की अवधि 7 हफ्ते रही, और इस दौरान लीवर और पैंक्रियास (अग्न्याशय) जैसे अंगों में संरचनात्मक सुधार भी देखा गया — जो बताता है कि असर सिर्फ अस्थायी नहीं बल्कि व्यापक था।

  • 🔎 इसका मतलब — क्यों है यह खोज मायने रखती

    • यह सिर्फ एक दवा-नियंत्रण (symptom control) नहीं, बल्कि शरीर की अंदरूनी क्रियाशीलता (metabolic balance) को साधने की कोशिश है — जो पारंपरिक औषधियों/हर्बल दवाओं की पुरानी समझ से मेल खाता है।

    • अगर आगे मानव पर किए गए क्लीनिकल अध्ययन सफल हुए — तो यह एक प्राकृतिक, साइड-इफेक्ट्स रहित विकल्प हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज़ के दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक दवाओं से बचना चाहते हैं।

    • यह खोज इस बात का प्रमाण है कि पारंपरिक औषधीय पौधों में अभी भी बहुत संभावनाएँ शेष हैं — और वैज्ञानिक शोध उन्हें आधुनिक चिकित्सा में शामिल कर सकता है।

    ⚠️ लेकिन — अभी सावधानी जरूरी

    • यह अध्ययन सिर्फ चूहों (माउस) पर हुआ है; इसका अर्थ है कि यह “शुरुआती (preclinical)” खोज है। मानव शरीर पर, उसके मेटाबॉलिज्म, दवा-प्रतिक्रिया, साइड-इफेक्ट्स आदि पर यह असर वैसा ही होगा या नहीं — यह अभी अनिर्णित है।

    • इसलिए, इसे तुरंत “डायबिटीज़ की दवा” समझना जल्दबाज़ी होगी। आगे बड़े, नियंत्रित (clinical) परीक्षणों की जरूरत है।

    • इसके अलावा, पौधे की खपत (फल, अर्क) की मात्रा, खुराक, तैयारी — ये सब मानकीकृत (standardised) होने चाहिए; वरना असर अलग हो सकता है।

      रेगिस्तानी बेरी (Nitraria roborowskii) और आयुर्वेद: संभावनाएँ

      1. प्राकृतिक हर्बल विकल्प

        • यह शोध दर्शाता है कि रेगिस्तानी बेरी का अर्क (NRK‑C) ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकता है। आयुर्वेद में भी “मधुमेह रोग (प्रसूत/प्रभव)” के लिए प्राकृतिक जड़ी‑बूटियों के सेवन की सलाह दी जाती है। इस बेरी को आधुनिक हर्बल थेरपी में शामिल करने की संभावना है।

      2. मेटाबॉलिक संतुलन पर असर

        • अध्ययन में PI3K/AKT सिग्नलिंग पाथवे के माध्यम से मेटाबॉलिक सुधार देखा गया। आयुर्वेद में शरीर के अंदरूनी संतुलन (धातु, दोष और अग्नि) को ठीक करने की परंपरा रही है। यह शोध आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के बीच एक पुल की तरह काम कर सकता है।

      3. साइड‑इफेक्ट कम और प्राकृतिक उपचार

        • वर्तमान डायबिटीज़ दवाओं के दुष्प्रभावों से बचाव के लिए यह हर्बल विकल्प आशाजनक है। आयुर्वेदिक उपचार की तरह यह प्राकृतिक, धीरे‑धीरे असर डालने वाला और कम हानिकारक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

      4. भविष्य की दिशा

        • आगे के मानव क्लीनिकल परीक्षण और मानकीकृत अर्क निर्माण से यह आयुर्वेदिक दवाओं और हर्बल सप्लीमेंट्स में शामिल हो सकता है।

        • यह शोध आयुर्वेद और आधुनिक बायोमेडिकल रिसर्च के बीच सामंजस्य का एक उदाहरण बन सकता है।


    ✅ सार में

    यह शोध उन लोगों के लिए एक नई उम्मीद है जो डायबिटीज़ जैसी जीवन-शैली रोगों से बचाव या इलाज ढूँढ रहे हैं — क्योंकि यह प्राकृतिक, हर्बल स्रोत पर आधारित है। अगर आगे के अध्ययन सफल रहे, तो आयुर्वेद और पारंपरिक जड़ी-बूटी उपचार (herbal medicine) में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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