वासा दे रोगों में आराम

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आज हम आपको एक ऐसी औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका महत्व आयुर्वेद के चिकिसकों के लिए सदियों से रहा है ,जिसे वासा के नाम से जाना जाता है I इसे अडूसा,वसाका,वासिका आदि नामों से जाना जाता है I अंग्रेजी में यह वनस्पति “मालाबार नट” के नाम से जानी जाती है I यह एक ऐसी औषधीय वनस्पति है ,जिसका प्रयोग वेस्टर्न मेडिसिन में भी बलगम को निकालने वाली (कफ-एक्स्पेकटोरेंट )औषधि के रूप में किया जाता है I इसके झाड़ीनुमा पौधों को अक्सर आपने 1200 -4000 फीट क़ी उंचाई पर देखा होगा I इसकी पहचान इसके पत्तों से क़ी जा सकती है ,जो तीन से आठ इंच लम्बे एवं नोकदार होते हैं Iइसके फूल मंजरियों में श्वेतवर्ण के होते हैं जो प्रायः फ़रवरी से मार्च के महीने में आते हैं I इस वनस्पति की पहचान सहित गुणधर्मों क़ी चर्चा को हमने विडीयो के माध्यम से भी बताने का प्रयास किया है ,आइये इसकी संक्षिप्त चर्चा करें :-
-यदि अडूसे के गुण धर्मों पर गौर करें तो यह हमारे स्वर के लिए उत्तम,हृदय ,तृष्णा ,श्वास -कास ,प्रमेह एवं क्षय रोग पर विशेष कार्यकारी होता है I
-अडूसे का विशेष प्रभाव श्वसन -सस्थान पर देखा जाता है,यह श्वास नलिकाओं को विस्फारित करने का काम करता है जिसे ब्रोंको-डायलेटर प्रभाव कहा जाता है, यह प्रभावएस्थमा (दमा ) के रोगियों काफी लाभकारी होता है I
-रक्त नलिकाओं को भी थोड़ा विस्फारित कर वासा कुछ हद तक रक्तचाप को भी कम करने का प्रभाव दर्शाता है I
– अडूसा कफ़ को पतला कर बाहर निकालता है जिसे कफ-एक्स्पेकटोरेंट एक्शन के रूप में जाना जाता है I
-वासा रक्तशोधक एवं रक्त्स्तम्भ्क (खून रोकने वाला) प्रभाव दर्शाता है I
आईये अब आपको हम कुछ चुनिन्दा योग (नुस्खे) बतलाते हैं जो इसके गुणों को और अधिक स्पष्ट करेगा :-
-यदि आप सिर- दर्द से परेशान हों तो बस अडूसे के फूलों को सुखाकर इसे महीन पीस लें …अब इसमें पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में थोड़ा गुड मिलाकर इसकी गोलियां बना लें ..हो गयी सिरदर्द क़ी दवा तैयार !
-यदि आँखों में सूजन आ गयी हो तो इसके ताजे फूलों को तोड़ लें और इसे गर्म कर आँखों के चारों ओर बांधने से आँखों के गोलक क़ी सूजन कम हो जाती है I
-यदि मुहं में छाले पड़ गए हों तो बस केवल इसके दो से चार पत्तों को चबा लें ओर इसका रस चूसकर बांकी हिस्सा थूक दें I
-इसकी टहनियों से दातुन करने से भी मुहं के रोगों में लाभ मिलता है I
-यदि आपके दांतों में केविटी बन गयी हो तो बस सूराख वाले स्थान में वासा का सत्व भर दें, निश्चित लाभ मिलेगा I
-वासा के पत्तों का काढा बनाकर कुल्ला करने मात्रा से मसूड़ों में होने वाले दर्द से निजात पाया जा सकता है I
-वासा का एक अचूक प्रचलित योग निम्नानुसार है :- वासा ,हरिद्रा ,धनियाँ ,गुडूची ,पीपल एवं शुंठी इन सबको सममात्रा (10-10 gm ) लेकर काढा बना लें ,अब इसमें काली मिर्च का चूर्ण आधे ग्राम क़ी मात्रा में मिलाकर श्वास (दमे ) से पीड़ित रोगी को पिला दें ..यह योग श्वास रोगियों में चमत्कारिक प्रभाव दर्शाता है I
-दमा रोगियों के लिए वासा के ताजे पत्तों के साथ थोड़ी मात्रा में काले धतूरे के पत्तों को साथ मिलाकर सुखाकर इसके चूर्ण क़ी धूम्र सेवन कराने से लाभ मिलता हैI
-यदि आपकी खांसी रुक नहीं रही हो तो बस अडूसे के ताजे पत्तियों का स्वरस निकाल लें और इसे शहद के साथ 5-10 ग्राम क़ी मात्रा में चाट लें ..इससे खांसी ,श्वांस और दमा क़ी स्थितियों में लाभ मिलता हैI
-यदि सूखी खांसी परेशान कर रही हो तो बस वासा ,मुनक्का और मिश्री इन सबका एक साथ मिलाकर काढा बना लें और इसका सेवन 10-15 ml क़ी मात्रा में दिन में तीन से चार बार करेंI
– वासा क़ी पत्तियों के स्वरस को अदरख स्वरस एवं शहद के साथ एक चम्मच क़ी मात्रा में लेने से किसी भी प्रकार क़ी खांसी में आराम मिलता है I
-वृक्कशूल (रीनल कोलिक ) से परेशान रोगी में वासा और नीम की पत्तियों को गर्म कर नाभि के निचले हिस्से पर सेंक करने मात्र से लाभ मिलता है I
-स्त्रियों में अनियमित मासिक चक्र की स्थिति में आप वासा की पत्तियों को दस ग्राम तथा मूली एवं गाजर के बीजों को पांच ग्राम की मात्रा में लेकर इन सभी को आधे लीटर जल में पकायें ..जब चौथाई भाग शेष रहे तब इस काढ़े को दस से पंद्रह मिली की मात्रा में खाली पेट पिलाने से लाभ मिलता है I
-मूत्र से सम्बंधित परेशानियों में अडूसे की पत्तियों को ककड़ी एवं खरबूजे के बीजों के साथ दस -दस ग्राम की मात्रा में पीसकर पीने से लाभ मिलता है I
-अडूसे की जड़ को पीसकर गर्भवती स्त्रियों के नाभि एवं योनि पर लेप करने या केवल इसकी जड़ को कमर में बाँध देने भर से प्रसव सुख- पूर्वक होता है I
-कलिहारी,पाठा,अडूसा,अपामार्ग इनमें से किसी की भी जड़ को गर्भवती स्त्री की नाभि,बस्ति प्रदेश एवं योनि के आसपास लेप कर देने से प्रसव सूखपूर्वक हो जाता हैI
-यदि शीघ्र-पतन या शुक्रमेह से पीड़ित रोगी को वासा के फूलों को अच्छी तरह से कूटकर उसमें दुगुनी मात्रा में बंग भस्म मिलाकर खांड के साथ खिला देने से लाभ मिलता हैI
-कामला (जौंडिस ) से पीड़ित रोगियों में वासा के पंचांग के स्वरस को दस मिली की मात्रा में शहद और मिश्री के साथ पिला देने से लाभ मिलता है I
-रक्तपित्त (खून बाहर निकलने की स्थिति ) में अडूसे की पत्तियों के स्वरस को निकालकर पांच से दस ग्राम की मात्रा में खांड के साथ मिलाकर सुबह शाम सेवन कराने मात्र से लाभ मिलता हैI
-यदि आप जोड़ों के दर्द से परेशान हों तो बस अडूसे की पत्तियों को गर्म कर दर्द वाली जगह पर बाँध दें ..इससे तुरंत लाभ मिलता है I
-यदि आप दाद -खाज -खुजली से परेशान हों तो अडूसा आपके लिए कमाल की औषधि साबित होगी ..बस आप इसकी कोमल पत्तियों को पांच से दस ग्राम की मात्रा में हल्दी एवं गोमूत्र के साथ पीसकर प्रभावित स्थान पर लेप कर देंI
-अडूसा पैत्तिक एवं कफज ज्वर में भी लाभकारी औषधि के रूप में काम करती है ..पैत्तिक बुखार में आंवले के साथ काढा बनाकर और कफज ज्वर में त्रिफला,पटोल पत्र कुटकी ,पिप्पली मूल के साथ काढा बनाकर शहद के साथ प्रयोग करने से लाभ मिलता है I
ये तो कुछ चुनिन्दा नुस्खे हैं जिनको बताने का मकसद इस वनस्पति के महत्व को उजागर करना मात्र है …आयुर्वेदिक चिकित्सक अनेक योगों में अपने ज्ञान अनुसार प्रयोग कराकर रोगी को लाभ देते हैंI

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