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कुपोषण से जूझ रहा बचपन

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बदलते परिवेश ने हमारी जीवनशैली को तो प्रभावित किया है लेकिन बचपन भी इससे अछूता नही है। इसके के कारणों पर गौर किया जाय तो खानपान की बदलती आदतें बच्चों के पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।यदि आंकड़ों पर गौर करें तो पूरी दूनिया में 5% बच्चों की मौत का कारण कुपोषण है।कुपोषण का सीधा संबंध शरीर को आवश्यक कैलोरी एवं अन्य आवश्यक तत्वों जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन,विटामिन एवं मिनरल्स की कमी होना है। विडंबना यह है कि भारत जैसे देश मे गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले मातापिता अपने बच्चों को संतुलित आहार नही दे पा रहे हैं वहीं दूसरी ओर अमीर और शहरी बच्चे भी खानपान की गलत आदतों की वजह से कुपोषण के शिकार ही जा रहे हैं।
कुपोषित बच्चों को कैसे पहचाने?

-बच्चे की लंबाई के मुताबिक वजन न बढ़ना वास्टिंग की स्थिति कहलाता है जबकि इसके विपरीत वजन के मुताबिक लंबाई का न बढ़ पाना स्टंटिंग कहलाता है तीसरी केटेगरी अंडरवेट बच्चो की अलग है
किसी भी देश का भविष्य उसके नौनिहाल होते हैं और यदि स्कूल जाने वाले ये बच्चे ही यदि उपरोक्त स्थिति से गुजर रहे हो तो आने वाले भविष्य का वयस्क रोगमुक्त कैसे हो सकता है?बचपन मे ही कुपोषण के शिकार बच्चे पूरे समाज को अस्वस्थ और शारीरिक संघर्ष के लिये बाध्य युवा के रूप में परिलक्षित कर देते हैं जो देश के लिये घातक होता है। पूरे एशिया में 2.8 मिलियन बच्चों में होंनेवाली मौत के पीछे भी कुपोषण ही मुख्य कारण है। आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा कुपोषण अधिक बड़ी समस्या है।लेकिन शहरी और पढ़े लिखे तबके वाले परिवारों में भी यह समस्या आम है।
यदि वैश्विक आंकड़ो पर गौर करें तो स्कूल जानेवाला हर तीसरा बच्चा कहीं न कहीं कुपोषण का शिकार है।विभिन्न शोध अध्धयन यह बताते है कि इनके पीछे पर्याप्त मात्रा में भोजन अभाव,भोजन में न्यूट्रियंट तत्वो का अभाव एवं स्वच्छता का अभाव ये तीन कारण मुख्य रूप से दिखते हैं और कालांतर में बच्चो को स्टंटिंग, वास्टिंग एवं अंडरवेट जी स्थिति से दो चार होंना पड़ता है
वर्ष 2018 के आंकड़ो के अनुसार 5 साल से छोटी उम्र के 155मिलियन बच्चे स्टन्टेड एवं 52 मिलियन बच्चे वास्टेड कुपोषण के शिकार रहे हैं।कुपोषण का प्रतिकूल प्रभाव बच्चों की मानसिक स्तर पर पड़ता है जिस कारण उसकी पढ़ाई लिखाई आदि सीधे प्रभावित होती है।
बच्चों में होनेवाले कुपोषण के पीछे सहायक कारण
-माता पिता का अशिक्षित होना
-खान पान की गलत आदतें
-माता द्वारा कई सारे बच्चो को जन्म देना
-स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं का ठीक से काम न कर पाना।
-अस्वच्छ एवं दूषित पानी का सेवन

बच्चों में कुपोषण रोकने के क्या हैं उपाय :

-बचपन से ही शारीरिक एवं मानसिक रूप से पोषण हर बच्चे के लिये नितांत आवश्यकता है।हमे बच्चों की डाइट एवं फ़ूड हैबिट्स पर हमेशा ध्यान देना चाहिये।

-बचपन से ही बच्चों को प्राकृतिक ,सुपाच्य एवं सभी पोषक तत्वों से भरपूर आहार द्रव्यों का प्रयोग कराना चाहिये।

-फल सब्जियों को भोजन में निदमित रूप से सेवन करने की आदत बच्चों को बचपन से ही डाल देनी चाहिये।

-फास्ट फ़ूड जैसे पिज़्ज़ा बर्गर या इंस्टेंट नूडल्स को लगातार भोजन के विकल्प के रूप में लेने की आदत से बच्चो को रोकना चाहिये।

-दूध का नियमित प्रयोग एक संतुलित आहार का उत्तम विकल्प है जिसमे शरीर के लिये आवश्यक पोषक तत्व पाये जाते हैं।

-आहार में दालों के साथ साथ प्रोटीन की उचित मात्रा को लिया जाना नितांत आवश्यक है।

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3 thoughts on “कुपोषण से जूझ रहा बचपन

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